इस भारतीय ने बनाया प्लास्टिक की थैलियों का विकल्प जिसे आप खा भी सकते हैं

भारत में हर वर्ष प्लास्टिक की थैलियों (Plastic Carry Bag) की वजह से लाखों गायें और जानवरों की मृत्यु हो जाती हैं, जिनके हत्यारे अप्रत्यक्ष रूप से हम सब होते हैं|और शायद इस बात से हम में से ज्यादातर लोगों को कोई फर्क भी नहीं पड़ता|
लेकिन मंगलौर के अश्वत हेगड़े ने इसका एक शानदार समाधान निकाला हैं| 
अगर आपको कहा जाए कि रोजमर्रा में काम में आने वाली थैलियों (Carry Bag) को खाया भी जा सकता है| तो क्या आप विश्वास करेंगे?
लेकिन अश्वत ने इस बात को सच करके दिखाया है| उन्होंने प्लास्टिक थैलियो के विकल्प के बदले Organic Bag बनाये है| जिन्हें इस्तेमाल करने के बाद जानवरों द्वारा खाया भी जा सकता है क्योंकि ये थैलियो प्लास्टिक प्रदार्थ से नहीं बल्कि 100% प्राक्रतिक प्रदार्थों से बनाई गई हैं|
खुद अश्वत ने भी अपनी बात को साबित करने के लिए इन थैलियों को खाकर दिखाया हैं|

शुरुआत:-

जब 4 साल पहले मंगलोर नगर पालिका ने प्लास्टिक थैलियो पर बैन लगाया था| तो अश्वत के दिमाग में एक ऐसी थैलियो बनाने का विचार आया जो सस्ती हो औरअगर उसे पशु खाये भी तो कोई परेशानी न हो और आसानी से नष्ट भी की जा सके|
इस विचार के बाद अश्वत ने अपनी टीम के साथ मिलकर प्राक्रतिक प्रदार्थ जैंसे आलू, साबुदान, मक्का और अन्य चीजो के तेल को प्रयोग में लेते हुए काम शुरु कर दिया| लगातार 4 साल मेहनत और जज्बे के कारण उन्होंने एक ऐसी थैंली बना ली जो प्लास्टिक थैलियो की तरह है, पर उसमें 1 प्रतिशत भी प्लास्टिक नहीं है| अगर इन थैलियो को गर्म पानी में रखा जाए तो ये 15 सेकंड के अन्दर आसानी से नष्ट हो जाएंगी, और यदि इन्हें कोई पशु भी खाता है तो उसे कोई परेशानी नहीं होगी| इन थैलियों को फेंकने के 180 दिन के बाद ये स्वत: ही नष्ट हो जाएंगी, इसलिए इससे पर्यावरण को बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचेगा|

प्लास्टिक की थैलियों से बेहतर और सस्ती:- 

Organic carry bags
इन कैरी बैग्स की सबसे अच्छी बात यह है कि वो एकदम प्लास्टिक की थैलियो जैसी ही लगती है, और उन्ही की तरह वजन उठाने की क्षमता रखती है|उत्पादन शुरू होने के बाद इनकी लागत प्लास्टिक थैलियों से भी कम रहने की संभावना हैं|
अगर इन थैलियो को गर्म पानी में रखा जाए तो ये 15 सेकंड के अन्दर आसानी से नष्ट हो जाएंगी, और यदि इन्हें कोई पशु भी खाता है तो उसे कोई परेशानी नहीं होगी| इन थैलियों को फेंकने के 180 दिन के बाद ये स्वत: ही नष्ट हो जाएंगी, इसलिए इससे पर्यावरण को बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचेगा|

राज्य प्रदुषण नियंत्रण द्वारा मंजूरी:-

अश्वत के कारनामे के कारण कर्नाटका राज्य प्रदूषण नियंत्रण ने इस थैलियो को मंजूरी दे दी है और केंद्र सरकार की लेब में इसका सफल परीक्षण हो चुका है| जिससे पता चला है कि इन थैलियो में प्लास्टिक तत्व बिल्कुल नहीं है|
कर्नाटका मिल्क फेडरेशन ने भी इन थैलियो को चुना है| और वे दूध की अलग-अलग किस्मों के लिए इन थैलियो का उपयोग करेंगे|इन थैलियो को क़तर के राष्टीय पर्यावरण दिवस पर पेश किया गया और इन्हें वहां भी सराहना मिली|

अगला लक्ष्य :-

अश्वत इतना बड़ा जादुई कारनामा करने के बाद भी रुके नहीं है, बल्कि उनका अगला लक्ष्य इतनी मजबूत थैलियो बनाना है कि जो 250 से 1000 किलो के वजन को भी सहन कर सके| और इसके लिए वह बैंगलूरू में एक कारखाना शुरू करने जा रहे है|

सोच को बदलो सितारे बदल जाएंगे, नजर को बदलो नज़ारे बदल जाएंगे|

कश्तिया नहीं, दिशाए बदलो, किनारे खुदबखुद बदल जाएंगे|

अश्वत हेगड़े जैसे लोग ही देश को आगे बढ़ाते हैं |उनके प्रयास यह बताते हैं कि देश का भला करना केवल नेताओं का ही काम नहीं हैं|हम अपने छोटे-छोटे प्रयासों से भी देश का कुछ तो अच्छा कर ही सकते हैं|
हमें पूरा विश्वास हैं कि अश्वत के प्रयास आगे जाकर बहुत बड़ा बदलाव लायेंगे| “ अश्वत हेगड़े ” की इस काबिलियत को happyhindi.com का सलाम|

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